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छत्तीसगढ़ शराब कांड में ACB की बड़ी कार्रवाई, दो CA हिरासत में, खुल सकते हैं कई राज

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। बिलासपुर के चार्टर्ड अकाउंटेंट मिश्रा और उनके भाई को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने हिरासत में लिया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने इस घोटाले से जुड़े काले धन को वैध बनाने (मनी लॉन्ड्रिंग) में अहम भूमिका निभाई।

सूत्रों के अनुसार, एसीबी और ईओडब्ल्यू की संयुक्त टीम ने रायपुर और बिलासपुर स्थित उनके ठिकानों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर डेटा और अन्य डिजिटल सबूत जब्त किए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह सबूत घोटाले की जड़ों तक पहुंचने में मददगार होंगे।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मिश्रा ने शेल कंपनियों और फर्जी बैलेंस शीट के ज़रिए बड़ी मात्रा में अवैध धन को वैध दिखाने की कोशिश की। इन कंपनियों के माध्यम से पैसों की हेराफेरी की गई और उसे कारोबार के रूप में दिखाया गया।

दोनों आरोपियों को 21 जुलाई को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहां पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की जा सकती है। ACB के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “इनसे पूछताछ में घोटाले से जुड़े कई नए नाम और फंड ट्रेल सामने आने की संभावना है।”

इस घोटाले में अब तक पूर्व मंत्री कवासी लखमा, कारोबारी अनवर ढेबर, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा सहित कुल 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ईओडब्ल्यू ने हाल ही में 2300 पन्नों की पूरक चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें 29 लोगों के नाम शामिल हैं।

इस बीच कांग्रेस ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि यह जांच निष्पक्ष नहीं है और सत्ता के दबाव में की जा रही है। हालांकि जांच एजेंसियों का कहना है कि सबूतों के आधार पर ही कार्रवाई की जा रही है।

अब जांच का दायरा विदेशी लेन-देन, हवाला नेटवर्क और संदिग्ध बैंक खातों तक बढ़ाया जा रहा है। एजेंसियां शराब सिंडिकेट से जुड़े सभी आर्थिक लेन-देन की जांच कर रही हैं।

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